NOTHING IS PERMANENT IN THIS WORLD

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NOTHING IS PERMANENT IN THIS WORLD (जगत में कुछ भी परमानेंट नहीं है)

 भगवान बुद्ध एक बात अक्सर कहा करते थे कि *इस संसार में जिसे आप वास्तविक समझते हैं वह वास्तव में वास्तविक है नहीं ।।इस जगत में कुछ भी परमानेंट नहीं रहता है।।* लेकिन मनुष्य हर चीज पर अपनी मालकियत  दिखाता है ।।उदाहरण के लिए मनुष्य सोचता है कि वह उसकी पत्नी है,, वह उसका बच्चा है ,,वह उसकी घर है,, वह उसकी संपत्ति है,, वह उसकी जायदाद है ।।पर *बुद्ध कहते हैं कि जैसे-जैसे मनुष्य की चेतना विकसित होते जाती है वैसे वैसे उसकी समझ भी बढ़ती जाती है।। पत्नी तो वही रहती है, बच्चे भी वही रहते हैं पर मालकियत  वही नहीं रहती है।। संसार की क्षणभंगुरता जब दिखने लगती है तब हर चीज पर से मालकियत की भावना समाप्त होने लगती है।।* वैसे भी मालकियत  जमाना, किसी को अपने अधिकार में रखना बहुत गंदी बात है ।।यह एक प्रकार से हिंसा है।। यह निर्ममता है ।।

_जब हमें यह समझ में आ जाता है कि हम यहां जिस संसार में रहते हैं वह केवल क्षणभंगुर है तब यह संसार, पूरा संसार केवल एक क्षणभंगुर संसार रह जाता है। हमें यह बात समझ में आ जाती है कि हम यहां इस संसार में केवल कुछ क्षणों के लिए, कुछ दिनों के लिए और अधिक से अधिक कुछ वर्षों के लिए ही हैं , फिर हमको यहां से चले जाना है । किसी व्यक्ति ने हमारा अपमान कर दिया इससे क्या फर्क पड़ता है। क्या अंतर पड़ता है । कुछ वर्षों में तो हमारे और उसके बारे में कुछ भी तो सुनने को नहीं मिलेगा । यह मिट्टी का शरीर मिट्टी में ही मिल जाएगा । न जाने इस पृथ्वी पर कितने करोड़ लोग हम से पूर्व जीवित थे। और वह लोग भी हमारी तरह ही चिंतित और परेशान रहा करते थे । किसी व्यक्ति ने उनका अपमान किया था ।किसी व्यक्ति ने उनसे कुछ कह दिया था, अथवा  जब वे  सड़क से होकर गुजर रहे थे तो किसी व्यक्ति ने मुस्कुराते हुए उनका उपहास उड़ाया था ।जिससे उन्हें पीड़ा हुई थी, उन्हें क्रोध आया था, उन्हें चोट पहुंची थी ।पर कहां गए वह लोग ।।उनके मित्र और शत्रुओं के साथ उनका आखिर क्या हुआ । कहां गए उनके मित्र कहां गए उनके उपहास उड़ाने वाले शत्रु। जब तक वे यहां इस संसार में थे न जाने कितना हंगामा किया था । पर क्या आज वह हैं। इस संसार में क्या उनका अस्तित्व है ।_

_*बुद्ध कहते हैं कि यदि यह बात आपकी समझ में आ जाती है तो आप ज्यादा शोर-शराबा नहीं करेंगे संसार में।। आप इस संसार से बिना अधिक कोलाहल बिना शोर शराबा मचाए शांति से गुजर जाएंगे ।।बिना अधिक गंभीरता के, बिना किसी गौरव, प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाए हुए बिना अधिक कोलाहल किए इस संसार से होकर गुजर जाना ही जीवन का परम लक्ष्य होना चाहिए।। दुनिया की आपाधापी, भागदौड़ व्यर्थ है।। इतनी समझ हमें होनी चाहिए ।।*_

*आप संसार में तो रहे पर यह संसार आपके भीतर न रहे बस इतना ख्याल आपको रखना चाहिए।। आप कोई कर्म भी करे तो ऐसे जैसे कोई अभिनेता फिल्मों में एक्टिंग करता है।। इस संसार को एक सराय समझते हुए हंसते हुए यहां से विदाई लेना है बुद्धिमानी का प्रतीक होता है*